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Wednesday, February 8, 2017

सर्जिकल स्ट्राइक की कहानी: अमावस्या का इंतजार, 48 घंटे तक दुश्मन पर नजर, फिर मौत बनकर यूं बरसे भारतीय कमांडोज

दुश्मन पर आसमान से सटीक हमले करने के लिए मशहूर भारतीय सेना की विशिष्ट सैन्य टुकड़ी 'पैराशूट रेजिमेंट' की बहादुरी की अनगिनत कहानियों में अब एक और पन्ना जुड़ गया है। दरअसल, बीते साल 29 सितंबर को लाइन ऑफ कंट्रोल के दूसरी ओर आतंकियों के लॉन्च पैड्स को तबाह करने गई टीम में इस रेजिमेंट के जवान भी शामिल हैं। पैरा कमांडोज और पैराट्रूपर्स से लैस इस टीम को इस साल 26 जनवरी को सम्मानित किया गया। कई अफसरों को मेडल्स से नवाजा गया है।


इस ऑपरेशन की प्लानिंग और उसे अंजाम देने में बहुत सारे लोगों का हाथ है। हालांकि, फील्ड में जाकर दुश्मनों पर मौत बनकर बरसे इन कमांडोज को मेडल्स क्यों मिले, यह बताने के लिए सरकार ने इस ऑपरेशन के डिटेल्स शेयर किए हैं । इससे जुड़े दस्तावेज द टाइम्स ऑफ इंडिया के पास हैं। दस्तावेज से पता चलता है कि सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने में 19 पैरा कमांडोज का अभिन्न योगदान है। डॉक्युमेंट्स में इस ऑपरेशन को फील्ड में अंजाम देने की पूरी कहानी दर्ज है। इसके मुताबिक, पैरा रेजिमेंट के 4th और 9th बटैलियन के एक कर्नल, पांच मेजर, दो कैप्टन, एक सूबेदार, दो नायब सूबेदार, तीन हवलदार, एक लांस नायक और चार पैराट्रूपर्स ने सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया।

4th पैरा के अफसर मेजर रोहित सूरी को कीर्ति चक्र और कमांडिंग ऑफिसर कर्नल हरप्रीत संधू को युद्ध सेवा मेडल से नवाजा गया है। इस टीम को चार शौर्य चक्र और 13 सेवा मेडल भी दिए गए हैं। कर्नल हरप्रीत संधू को लॉन्च पैड्स पर दो लगातार हमले करने का काम सौंपा गया था। हमले की योजना बनाने और उसके सफल क्रियान्यवन के लिए ही उन्हें युद्ध सेवा मेडल से नवाजा गया है।

जम्मू-कश्मीर के उड़ी में सेना के कैंप पर हुए आतंकी हमले के बाद से ही भारतीय सेना ने पाक अधिकृत कश्मीर स्थित टेरर लॉन्च पैड्स पर सर्जिकल स्ट्राइक करने की योजना बनानी शुरू कर दी थी। हालांकि, मिशन को अंजाम देने के लिए अमावस्या की रात का इंतजार किया गया।
आखिरकार वह घड़ी आ ही गई। 28 और 29 सितंबर की दरमियानी रात को मेजर रोहित सूरी की अगुआई में आठ कमांडोज की एक टीम आतंकियों को सबक सिखाने के लिए रवाना हुई।

मेजर सूरी की टीम ने पहले इलाके की रेकी की। सूरी ने टीम को आदेश दिया कि वे आतंकियों को उनके एक लॉन्चपैड पर खुले इलाके में चुनौती दें। सूरी और उनके साथी टार्गेट के 50 मीटर के दायरे के अंदर तक पहुंच गए और वहां दो आतंकियों को ढेर कर दिया। इनको ठिकाने लगाते ही मेजर सूरी ने पास के जंगलों में हलचल देखी। यहां दो संदिग्ध जिहादी मौजूद थे। उनके मूवमेंट पर एक यूएवी के जरिए भी नजर रखी जा रही थी। सूरी ने अपनी सेफ्टी की परवाह न करते हुए दोनों आतंकियों को नजदीक से चुनौती दी और उन्हें भी ढेर कर दिया। 

एक अन्य मेजर को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि इन लॉन्चपैड्स पर नजदीक से नजर रखे। यह अफसर अपनी टीम के साथ हमले के 48 घंटे पहले ही एलओसी पार कर गया। इसके बाद से हमले तक इस टीम ने टार्गेट पर होने वाले हर मूवमेंट पर नजर रखी। उनकी टीम ने इलाके का नक्शा तैयार किया। दुश्मनों के ऑटोमैटिक हथियारों की तैनाती की जगह का पता लगाया। उन जगहों की भी जानकारी जुटाई, जहां से हमारे जवान मिशन के दौरान सुरक्षित रहकर दुश्मन पर फायरिंग कर सकें।

इस अफसर ने एक हथियार घर को तबाह कर दिया। इसमें दो आतंकी मारे गए। हमले के दौरान यह अफसर और उनकी टीम नजदीक स्थित एक अन्य हथियार घर से हो रही फायरिंग की जद में आ गए। अपनी टीम पर मंडरा रहे खतरे को भांपते हुए इस मेजर ने बड़ा साहसिक कदम उठाया। वह अकेले ही रेंगते हुए इस हथियार घर तक पहुंचा और फायरिंग कर रहे उस आतंकी को भी खत्म कर दिया। इस अफसर को शौर्य चक्र से नवाजा गया है।

तीसरा मेजर अपने साथी के साथ एक आतंकी शेल्टर के नजदीक पहुंचा और उसे तबाह कर दिया। इस वजह से वहां सो रहे सभी जिहादी मारे गए। इसके बाद, उसने हमला करने वाली दूसरी टीमों के सदस्यों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया। यह अफसर ऑपरेशन के दौरान आला अधिकारियों को ताजा घटनाक्रम के बारे में लगातार अपडेट देता रहा। इस मेजर को भी शौर्य चक्र मिला है।

चौथे मेजर को सेना मेडल मिला है। उसने दुश्मनों के ऑटोमैटिक हथियार से लैस एक ठिकाने को बेहद नजदीक से एक ग्रेनेड हमले में तबाह कर दिया। इसमें दो आतंकी मारे गए।

यह सर्जिकल स्ट्राइक इतना आसान ऑपरेशन भी नहीं था। हमला करने वाली एक टीम आतंकियों की जोरदार गोलाबारी में घिर गई। पांचवें मेजर ने तीन आतंकियों को रॉकेट लॉन्चर्स के साथ देखा। ये आतंकी चौथे मेजर की अगुआई में ऑपरेशन को अंजाम दे रही टीम को निशाना बनाने वाले थे। हालांकि, इससे पहले कि ये आतंकी कुछ कर पाते, पांचवें मेजर ने अपनी सेफ्टी की परवाह न करते हुए इन आतंकियों पर हमला बोल दिया। दो को उसने ढेर कर दिया, जबकि तीसरे आतंकी को उसके साथी ने मार गिराया।

इस मिशन में न केवल अफसरों, बल्कि जूनियर अफसरों और पैराट्रूपर्स ने भी अदम्य साहस का परिचय दिया। शौर्य चक्र से सम्मानित एक नायब सूबेदार ने आतंकियों के एक ठिकाने को ग्रेनेड बरसाकर तबाह कर डाला। इसमें दो आतंकी मारे गए। जब उसने एक आतंकी को अपनी टीम पर फायरिंग करते देखा तो उसने अपने साथी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसके बाद उसने आतंकी पर हमला बोल दिया और उसे ठिकाने लगा दिया।

इस ऑपरेशन के दौरान किसी भी भारतीय जवान को अपनी शहादत नहीं देनी पड़ी। हालांकि, निगरानी करने वाली टीम का एक पैराट्रूपर ऑपरेशन के दौरान घायल हो गया। उसने देखा कि दो आतंकी हमला करने वाली एक टीम की ओर बढ़ रहे हैं। पैराट्रूपर ने उनका पीछा किया, लेकिन गलती से उसका पांव एक माइन पर पड़ गया। इस धमाके में उसका दायां पंजा उड़ गया। अपनी चोटों की परवाह न करते हुए इस पैराट्रूपर ने आतंकियों से मोर्चा लिया और उनमें से एक को ढेर कर दिया।

(कुछ सैनिकों के नाम उनकी पहचान छिपाने के मकसद से नहीं छापे गए हैं।)

Source : http://nbt.in/j9RRYZ/kcf 

Thursday, May 22, 2014

Rs 50,000 salary to laundry services: Here’s what your MP gets

While the 16th Lok Sabha is yet to be constituted, when they meet for the Budget session in June-end this year, Members of Parliament are already entitled to various benefits as they come into effect the day the Election Commission officially declares the results.

With perks ranging from a monthly salary of Rs 50,000 to quarterly laundry services for furnishings such as curtains and upholstery, our MPs literally do not have to spend on anything. Even meals inside Parliament are heavily subsidised.



Here's a look at some of the many perks and privileges that an MP gets:
  • Each member of Lok Sabha and Rajya Sabha is entitled to receive a salary of Rs 50,000 per month during the whole term of office.
  • If an MP signs the Parliament register every day, he is entitled to a daily allowance of Rs 2,000.
  • A Member of Parliament is also entitled to Rs 45,000 as monthly allowance for work in the member's constituency.
  • The MP is also entitled to Rs 45,000 a month for meeting office expenses. Of this amount, Rs 15,000 can be spent on stationery items and postage and Rs 30,000 for a person providing secretarial assistance to the MP.
  • Under the Members of Parliament Local Area Development Scheme (MPLADS) each member could recommend to the concerned District Authority developmental works to the tune of Rs 5 crore per annum to be taken up within the constituency. 
Travel
  •  An MP is also entitled to travel allowances when he/she is travelling on offical duty - either to attend Parliament, a committee meeting or any other duty that is connected to his office. The allowance covers return travel to the MP's usual place of residence.
Air travel - One and one-fourth (25 percent more) than the air fare of the airlines in which the member travels. The MP can avail 34 single air journeys during a year with his/her spouse. The MP's spouse/companion can also travel alone eight times in a year to meet the member. However, this amount is included in the 34 journeys.
Train travel - The MP is entitled to a non-transferable first class AC train pass allowing him/her to travel in any train. The MP is also entitled to one first class and one second class fare each time the MP travels.
Road travel - Perhaps the means of travel least used, MPs are entitled to Rs 16 per km travelled.

Accomodation
  • Each MP is entitled to a rent-free flat or hostel accommodation throughout his/her term of office. A member who requests for a bungalow shall pay full licence fee if entitled to such accommodation. 
  • After they cease to be MPs, the accomodation can be retained for a maximum period of one month, provided the rent amount is paid by the MP. 
  • However, in case of an MP who passes away while in office, the family may retain government accommodation for a maximum period of six months from the date of death on payment of rent. 
  • An MP is also entitled to guest accomodation at Western Court Hostel, Janpath. 
Other benefits
  • An MP is entitled to a loan of Rs 4 lakh  to purchase a vehicle. The amount, however, is recovered from the MP's salary in sixty equal installments.
  • A member is entitled to have three telephones. One of which should be installed at the MPs residence or office in Delhi and one at the MP's usual place of residence or any such place selected by the MP. 
  • The MP is also entitled to two mobile phone connections, one of which has to be on a BSNL/MTNL network. The MP is also entitled to 3G facilities on these mobile numbers. 
  • The total number of free calls on these numbers collectively is 1,50,000 local calls in a year.The 3G data charge is also adjusted within this amount.
  • Other facilities enjoyed by members include washing of sofa covers and curtains every three months, as well as purchase of  furniture not exceeding Rs 75,000. 

For a complete list of all the benefits an MP is entitled to, click here.

Source

Thursday, October 10, 2013

सचिन के संन्यास से सूना हुआ क्रिकेट |



























उनके शतक के इंतजार में भारत में जिंदगी रुक सी जाया करती थी। उनकी एक झलक पाने के लिए हजारों लोग घंटों लाइन लगाकर भी बिना किसी शिकन के स्टेडियम जाने को तैयार रहते थे। उनकी बेहतरीन बैटिंग देखने के लिए स्कूल-कॉलेज और ऑफिस से छुट्टी ले लेना आम बात थी। पूरा देश उनकी तरफ इस उम्मीद से निहारता था कि कैसी भी परिस्थियां हो और सामने कितनी भी खतरनाक टीम या गेंदबाज हो सिर्फ यही बल्लेबाज इस देश को जीत दिला सकता है।
करोड़ों हाथ उनके लिए एक साथ दुआएं मांगते थे। करोड़ों आंखें और कान टेलीविजन और रेडियो से उनके शतक बनने और भारत को जीत दिलाने का इंतजार करते रहते थे। इतनी सारी उम्मीदों का दारोमदार सिर्फ एक शख्स पर था, जी हां सही पहचाना आपने उस खिलाड़ी का नाम है सचिन तेंडुलकर। साल 1989 में जब से 16 साल की उम्र में सचिन ने भारत के लिए क्रिकेट खेलने की शुरुआत की तब से लेकर अब तक यानि की पिछले 24 सालों से वह करोड़ों लोगों की उम्मीदों को अपने कंधों पर बाकायदा ढोते आए हैं।

फिलहाल यह उम्मीद और इंतजार अब खत्म होने को हैं। नवंबर में अपना 200वां टेस्ट खेलने के साथ ही सचिन टेस्ट क्रिकेट से भी संन्यास ले लेंगे। अब न उनके फैंस को उनके शतकों का इंतजार होगा और न ही वह उम्मीदें। उनके फैंस अब किसी मैच में वैसा दबाव नहीं महसूस करेंगे जैसा वह पिछले दो दशकों से करते आए हैं। अब सचिन-सचिन का शोर भी नहीं सुनाई देगा। वजह अब उनमें सचिन नहीं होंगे। शोर, देशभक्ति, जज्बा क्रिकेट में अब भी कायम रहेगा। खेल यूं ही चलता रहेगा लेकिन एक बात तय हैं कि उनके जैसा खिलाड़ी भारत को अब और नहीं मिलेगा। ऐसे खिलाड़ी सदी में एक बार पैदा होते हैं। 

सचिन ने जब से क्रिकेट खेलना शुरू किया वह खास बन गए थे। छोटी सी उम्र में नित नई ऊंचाइयां छूते हुए वह इस देश के सबसे लाडले खिलाड़ी बन गए। सिर्फ 16 साल में टेस्ट पदार्पण, 17 साल में टेस्ट शतक, 19 साल में विश्वकप खेलना। 100 अंतरराष्ट्रीय शतक, टेस्ट में 51 शतक, वनडे में 49 शतक, टेस्ट में 15 हजार रन, वनडे में 18 हजार से ज्यादा रन, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 50000 हजार से ज्यादा रन।  उनका सफर किसी परीकथा सरीखा लगता है। यकीन करना मुश्किल हो जाता है कि एक खिलाड़ी इतने सारे रेकॉर्ड कैसे बना सकता है। 

यह जानकर कि सिर्फ दो टेस्ट मैच बाद हम फिर कभी इस महान खिलाड़ी को खेलते नहीं देख पाएंगे उनके फैंस का भावुक होना स्वाभाविक है। शायद ही कभी क्रिकेट को उनके जैसी प्रतिभा वाला खिलाड़ी मिले। उनको खेलते देखते हुए जवान हुई पीढ़ी को उनकी बैटिंग को और न देख पाने का मलाल हमेशा रहेगा। उनकी बैटिंग की यही खासियत थी कि वह चाहे पहली गेंद का सामना कर रहे हों या शतक के करीब हों या दोहरा शतक जमा चुके हों आप कभी भी उनकी बैटिंग से बोर नहीं होते थे। उनके बैटिंग में हमेशा वही पैनापन वही ताजगी नजर आती था। उनका बैटिंग के जादुई आकर्षण से खुद को बचा पाना नामुकिन था।

उनके फैंस उन्हें कभी रिटायर होते नहीं देखना चाहते थे। सचिन को जितना प्यार इस देश और क्रिकेट के फैंस से मिला उतना तो सर डॉन ब्रेडमैन को भी नहीं मिला। उनके फैंस इसीलिए उन्हें क्रिकेट के भगवान का दर्जा देते थे, जिसके लिए कुछ भी असंभव नहीं था। कई लोगों ने सचिन के लिए ही क्रिकेट देखना शुरू किया और सचिन के संन्यास के बाद शायद ही वे क्रिकेट को देखें या उससे उतना ही जुड़ाव महसूस करें। उनके लिए क्रिकेट का मतलब सिर्फ सचिन तेंडुलकर है। उनके फैंस तो यही चाहते थे कि वह कभी रिटायर ही न हों और हमेशा खेलते रहें। 

इस खिलाड़ी की खासियत य़ह है कि उन्हें देखकर और आदर्श मानकर न सिर्फ इस देश से और भी कई बेहतरीन क्रिकेटर निकले बल्कि उन्हें आदर्श मानने वाले युवाओं ने उनकी लगन, अनुशासन और प्रतिबद्धता को आदर्श मानकर समाज के कई दूसरे प्रोफेशन में भी नाम कमाया। उनकी विनम्रता, क्रिकेट के लिए जुनून, देश के लिए प्यार, कड़ी मेहनत, अनुशासन इन सबका दूसरा उदाहऱण मिलना बहुत मुश्किल है।

एक लेख में उनके पूरे क्रिकेट करियर की यादों को समेट पाना नामुमकिन हैं। फिर भी बहुत सी यादें एकसाथ आ रही हैं। महज 16 साल की उम्र में महान अब्दुल कादिर की लगातार 4 गेंदों पर छ्क्के लगाना, 1992 में पर्थ और सिडनी में ऑस्ट्रेलिया के महान गेंदबाजी आक्रमण के सामने सिर्फ 19 साल की उम्र में बेहतरीन शतक जड़ना, न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे में सिर्फ 49 गेंदों में 84 रन की पारी, 1996 के वर्ल्ड कप में दो शतकों के साथ सिर्फ 7 मैचों में 523 रन ठोक डालना,वर्ष 1998 में शारजाह में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दो शतकों के साथ भारत को खिताब दिलाना,  उसी साल 9 वनडे शतकों के साथ एक ही साल में 1894 वनडे रन बनाना, पाक के खिलाफ 1999 में चेन्नै में 136 रन की पारी, उसी साल पिता के निधन के बाद भी कीनिया के खिलाफ शतक, साल 2011 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चेन्नै में शानदार शतक, 2003 के विश्वकप में शोएब अख्तर की गेंद पर छक्का, उनका 100वां शतक। ये तो छोटी सी लिस्ट भर है इस महान खिलाड़ी के कारनामों की। उनकी महानता की कहानी कहीं ज्यादा बड़ी है।

उनके संन्यास के साथ ही भारत एक महान खिलाड़ी की सेवा से वंचित हो जाएगा। इतने लंबे समय क्रिकेट की सेवा करने के लिए हम उनके आभारी रहेंगे। हम सौभाग्शाली हैं कि सचिन हमारे युग में खेले, आने वाली पीढ़ियां खुद को इस बात के लिए कोसेंगी क्यों वह सचिन को खेलते हुए नहीं देख पाए। सचिन के संन्यास से निस्संदह उनके लाखों प्रशंसकों के मन ने कहीं न कहीं क्रिकेट से थोड़ा ही सही संन्यास जरूर ले लिया है। आपको सैल्यूट सचिन!

Source : blogs.navbharattimes.indiatimes.com